विटामिन-D


सही तरीके से ली गई धूप शरीर में विटामिन D बनाती है। हड्डियाँ मजबूत रखती है, इम्युनिटी बढ़ाती है, डिप्रेशन का खतरा घटाती है, इंसुलिन सेंसिटिविटी सुधारती है और स्लीप साइकिल को संतुलित रखती है। इसलिए धूप केवल रोशनी नहीं है — ये एक तरह की नेचुरल हॉर्मोनल थेरेपी है और खासकर वीगन्स के लिए यह और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।



हमारे देश में ज्यादातर लोगों के लिए रोज़ाना 15–25 मिनट धूप लेना उपयुक्त रहता है। सुबह 7 से 10 बजे के बीच का समय आमतौर पर बेहतर माना जाता है — ये टेम्पररी बैलेंस देता है: Vitamin D बनता है और सनबर्न का जोखिम भी कम रहता है। UV‑B किरणें सबसे ज़्यादा 10 बजे से 3 बजे के बीच मिलती हैं पर इस बीच सनबर्न का खतरा बढ़ जाता है इसलिए संतुलन ज़रूरी है।


खाने से मिलने वाले विटामिन D के स्रोत (जैसे फोर्टिफाइड प्लांट मिल्क, मशरूम जिसमें D₂ होता है, और D₃ जहाँ उपलब्ध हो) पर ध्यान दें। धूप के साथ साथ हर कुछ महीनों में—खासकर सर्दियों या कम धूप वाले समय में—ब्लड टेस्ट करवा कर 25(OH)D लेवल चेक कराएं और आवश्यकता हो तो सप्लीमेंट लें।


 ☘️ वीगन सुदेश 

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